संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष द्वारा
विश्व पर्यावरण दिवस
5 जून 2019
संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेश का संदेश
इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम वायु प्रदूषण है। विश्व में सभी लोग- बड़े शहरों से लेकर छोटे गांवों तक में लोग अशुद्ध वायु में सांस ले रहे हैं। विश्व में हर दस में से लगभग नौ लोग उन वायु प्रदूषकों के संपर्क में हैं जोकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के वायु गुणवत्ता मानकों से अधिक हैं। इससे जीवन संभाव्यता कम हो रही है और विश्व की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान हो रहा है।
वायु की गुणवत्ता में सुधार के लिए हमें अपने शत्रुओं को पहचानना होगा। वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों और बीमारियों का कारण वे महीन कण हैं जो हर बार सांस लेने के दौरान हमारे फेफड़ों की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करते हैं। इन कणों के अनेक स्रोत हैं: ऊर्जा और परिवहन के लिए जीवाश्म ईंधन का प्रज्जवलन, रसायन और खनन उद्योग, कचरे को खुले में जलाना, जंगलों और खेतों की आग, घरों के भीतर खाना पकाने और गर्माइश के लिए अशुद्ध ईंधन का प्रयोग। ये विकासशील देशों की मुख्य समस्याएं हैं।
हर वर्ष प्रदूषित वायु 70 लाख लोगों की मौत का कारण बनती है। इससे दमा जैसी अनेक प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं और इससे बच्चों का सर्वांगीण विकास बाधित होता है। विश्व बैंक के अनुसार प्रत्येक वर्ष वायु प्रदूषण की लागत 5 खरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
अनेक वायु प्रदूषकों से ग्लोबल वार्मिंग भी होती है। ब्लैक कार्बन इसका एक उदाहरण है। यह डीजल इंजनों, कचरे को जलाने और गंदे चूल्हों से उत्पादित होता है। यह सांस के लिए बहुत हानिकारक होता है। वायु प्रदूषण के उत्सर्जन में कमी होने से न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि अगले कुछ दशकों में इससे ग्लोबल वॉर्मिंग 0.5 डिग्री सेल्सियस तक कम होगी।
इसलिए वायु प्रदूषण की समस्या को काबू करने से दोहरा लाभ होगा। ऐसे अनेक सफल कार्यक्रम चलाए गए हैं जिनसे वायु और ग्रीन हाउस उत्सर्जन कम होगा, जैसे कोयला चलित ऊर्जा संयंत्रों को समाप्त करना और कम प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, परिवहन और घरेलू ईंधन को बढ़ावा देना। प्रत्येक वर्ष जीवाश्म ईंधन से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश किया जा रहा है। इससे विश्व स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा में वृद्धि हो रही है। स्वच्छ परिवहन में भी इजाफा हो रहा है।
वायु की गुणवत्ता में सुधार और जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने की पहल में उम्मीद की किरण दिखाई देती है। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि वे जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में भाग लें। ऐसे उदाहरणों से प्रेरित होकर मैं सितंबर में इसका आयोजन कर रहा हूं। ऐसा कोई कारण नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसके लिए पहल नहीं कर सकता। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में मिसाल मौजूद हैं। वैज्ञानिकों ने सार्वजनिक और पृथ्वी की सेहत के लिए खतरे का संकेत दिया और सरकारों एवं व्यवसाय जगत ने ओजोन परत की रक्षा के लिए सफलतापूर्वक कार्य किया।
आज भी हम संकट का सामना कर रहे हैं। अब निर्णायक रूप से कार्य करने का समय आ गया है। सरकारों को मेरा संदेश स्पष्ट है: प्रदूषण में कटौती करें, जीवाश्म ईंधन पर सबसिडी खत्म करें और नए कोयला संयंत्रों का निर्माण बंद करें। हमें धूसर नहीं, हरित अर्थव्यवस्था चाहिए।
विश्व पर्यावरण दिवस पर मैं प्रत्येक व्यक्ति से पहल करने का आग्रह करता हूं ताकि हम सभी स्वच्छ वायु में सांस ले सकें। वे राजनीतिज्ञों पर दबाव बनाएं। व्यवसाय जगत को अपनी प्रवृत्ति बदलने को कहें। इसी प्रकार हम प्रदूषण को कम कर सकते हैं और जलवायु परिवर्तन पर प्रहार कर सकते हैं।


